Income Tax Rule: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फरवरी 2025 में पेश किए गए आम बजट में मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम के तहत टैक्स फ्री आय की सीमा को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब 12 लाख रुपये तक सालाना कमाई करने वाले व्यक्तियों को कोई आयकर नहीं देना होगा। यह निर्णय 1 अप्रैल 2025 से लागू हो गया है और इससे करोड़ों करदाताओं को बढ़ती महंगाई के बीच महत्वपूर्ण वित्तीय राहत मिलेगी।
इसके अलावा, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त लाभ की घोषणा की गई है। नए नियम के अनुसार, स्टैंडर्ड डिडक्शन की राशि बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि अब सैलरीड कर्मचारी 12.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर कोई आयकर नहीं देंगे। यह परिवर्तन भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।
सैलरीड कर्मचारियों के लिए विशेष प्रावधान
सैलरीड कर्मचारियों को इस नए टैक्स नियम से विशेष लाभ मिलेगा। जिन कर्मचारियों की मासिक आय एक लाख रुपये है, उनकी वार्षिक आय 12 लाख रुपये होती है, जो नई टैक्स फ्री सीमा के अंतर्गत आती है। इसका मतलब है कि उन्हें कोई आयकर नहीं देना होगा। इसी तरह, जिन कर्मचारियों की मासिक आय 1 लाख 6 हजार 250 रुपये है, उनकी वार्षिक आय 12.75 लाख रुपये होगी, और स्टैंडर्ड डिडक्शन के कारण, वे भी किसी आयकर का भुगतान नहीं करेंगे।
यह परिवर्तन विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो महंगाई और बढ़ते खर्चों से जूझ रहे हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन की बढ़ी हुई राशि का मतलब है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के हाथ में अधिक पैसा रहेगा, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे और अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे सकेंगे।
न्यू टैक्स रिजीम का स्लैब सिस्टम
2025 में लागू किए गए न्यू टैक्स रिजीम में आयकर स्लैब की व्यवस्था इस प्रकार है: 0 से 4 लाख रुपये की आय पर कोई कर नहीं, 4 से 8 लाख रुपये पर 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख रुपये पर 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख रुपये पर 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख रुपये पर 25 प्रतिशत और 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लगेगा।
यह स्लैब सिस्टम प्रगतिशील है, जिसका अर्थ है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, कर की दर भी बढ़ती जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कम आय वाले व्यक्तियों पर कर का बोझ कम हो और अधिक आय वाले व्यक्ति अधिक कर का भुगतान करें। इस प्रकार, नया टैक्स सिस्टम सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता के सिद्धांतों पर आधारित है।
13 लाख रुपये की वार्षिक आय पर कर गणना
13 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले व्यक्ति के लिए कर की गणना इस प्रकार होगी: स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000 रुपये) घटाने के बाद, कर योग्य आय 12.25 लाख रुपये होगी। इस आय पर कर की गणना स्लैब के अनुसार की जाएगी: 0 से 4 लाख रुपये पर 0 रुपये, 4 से 8 लाख रुपये पर 20,000 रुपये (5% की दर से), 8 से 12 लाख रुपये पर 40,000 रुपये (10% की दर से), और 12 से 12.25 लाख रुपये पर 3,750 रुपये (15% की दर से)।
कुल मिलाकर, आयकर की राशि 63,750 रुपये होगी, जिस पर 4 प्रतिशत सेस (2,550 रुपये) लगाया जाएगा। इस प्रकार, कुल देय कर 66,300 रुपये होगा। हालांकि, मार्जिनल रिलीफ के नियम के अनुसार, यदि कर की राशि कर योग्य आय से अधिक होती है, तो कर योग्य आय के बराबर ही कर देना होगा। इस प्रकार, 13 लाख रुपये की आय पर वास्तविक कर केवल 25,000 रुपये होगा।
15 लाख रुपये की वार्षिक आय पर कर गणना
15 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले व्यक्ति के लिए, स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000 रुपये) घटाने के बाद, कर योग्य आय 14.25 लाख रुपये होगी। इस आय पर कर की गणना स्लैब के अनुसार की जाएगी: 0 से 4 लाख रुपये पर 0 रुपये, 4 से 8 लाख रुपये पर 20,000 रुपये (5% की दर से), 8 से 12 लाख रुपये पर 40,000 रुपये (10% की दर से), और 12 से 14.25 लाख रुपये पर 33,750 रुपये (15% की दर से)।
कुल मिलाकर, आयकर की राशि 93,750 रुपये होगी, जिस पर 4 प्रतिशत सेस (3,750 रुपये) लगाया जाएगा। इस प्रकार, 15 लाख रुपये की वार्षिक आय पर कुल देय कर 97,500 रुपये होगा। यह राशि अब पहले से कम है, जिससे उच्च मध्यम वर्ग के व्यक्तियों को भी कुछ वित्तीय राहत मिलेगी।
नए कर नियमों का प्रभाव और महत्व
नए इनकम टैक्स नियमों का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव यह होगा कि मध्यम वर्ग के पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम होगी। इससे उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद करेगी। जब लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होगा, तो वे अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीदेंगे, जिससे मांग बढ़ेगी और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, कर बचत से लोग अधिक बचत और निवेश कर सकेंगे, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह विशेष रूप से युवा पेशेवरों और नए करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने वित्तीय भविष्य के लिए योजना बना रहे हैं। सरकार की यह पहल न केवल व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति में सुधार करेगी, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था के विकास में भी योगदान देगी।
सरकार द्वारा किए गए ये परिवर्तन भारतीय मध्यम वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण राहत हैं। टैक्स फ्री आय की सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये करने और स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये करने से न केवल करदाताओं की कर देनदारी कम होगी, बल्कि उनकी बचत क्षमता में भी वृद्धि होगी। यह कदम बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों के बीच एक सकारात्मक विकास है।
नए कर नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू हो चुके हैं, और करदाता अब इन लाभों का आनंद उठा सकते हैं। हालांकि, यह सलाह दी जाती है कि व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति के अनुसार, करदाता एक पेशेवर कर सलाहकार से परामर्श करें, ताकि वे इन नए नियमों का अधिकतम लाभ उठा सकें और अपनी कर देनदारी को कानूनी रूप से कम कर सकें।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किया गया है और इसे वित्तीय या कर सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इनकम टैक्स नियमों और स्लैब में परिवर्तन हो सकता है, और व्यक्तिगत कर देनदारी की गणना के लिए आधिकारिक स्रोतों या पेशेवर कर सलाहकारों से परामर्श करना उचित होगा। लेख में दी गई जानकारी लेखन के समय सही है, लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपडेटेड जानकारी प्राप्त करें।